उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में अंतरराष्ट्रीय ब्रिक्स अकादमिक मिड-टर्म सम्मेलन में 11 देशों के प्रतिनिधियों ने वैश्विक चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण और हरित औद्योगिक विकास जैसे मुद्दों पर मंथन किया. सम्मेलन भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 की थीम लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता (Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) पर केंद्रित रहा.
देहरादून एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बनी, जहां शुक्रवार यानी 29 मई को दून विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय ब्रिक्स अकादमिक मिड-टर्म सम्मेलन का आयोजन किया गया. सम्मेलन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया समेत 11 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. जहां बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच सतत विकास, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए.
यह सम्मेलन साल 2026 के लिए भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की केंद्रीय थीम ‘बिल्डिंग फॉर रिजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी’ पर आधारित रहा. हिमालयी राज्य उत्तराखंड में आयोजित इस कार्यक्रम में विशेष रूप से उन चुनौतियों पर चर्चा हुई, जिनका सामना दुनिया जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक अस्थिरता के रूप में कर रही है.
सम्मेलन का उद्घाटन उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के उपाध्यक्ष प्रो. हर्ष वी पंत और विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव एवं ब्रिक्स उप-शेरपा शंभू एल हक्की ने किया. इस अवसर पर रिसर्च एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज (RIS) के महानिदेशक प्रो. सचिन कुमार शर्मा भी मौजूद रहे.