30 जुलाई से हरिद्वार में शुरू होने जा रहे कांवड़ मेल को लेकर धर्माचार्य और साधु संतों ने शिव भक्त कावड़ियों से धार्मिक यात्रा की गरिमा बनाए रखना और सुरक्षित यात्रा करने की अपील की. इसके साथ ही सीमित मात्रा में गंगाजल उठाने का आग्रह भी साधु संतों की ओर से किया जा रहा है.
दरअसल, कुछ कांवड़िए अधिक से अधिक गंगाजल ले जाने की होड़ में अधिक वजनी कांवड़ लेकर चलते हैं. जिससे ना सिर्फ उनकी शारीरिक क्षति होती है बल्कि दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है. इसके साथ ही संतों ने शिव भक्तों से कांवड़ यात्रा की आड़ में हुड़दंग और मादक पदार्थों का सेवन ना करने की अपील भी की. साधु संतों ने कहा कांवड़ मेला भगवान शिव और मां गंगा को समर्पित है, इसलिए इस बार के कांवड़ मेले को आदर्श कांवड़ मेला बनाने में प्रशासन का सहयोग करें.
जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कांवड़ियों से शांतिपूर्ण तरीके से कांवड़ यात्रा करने की अपील की. उन्होंने कहा प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी करोड़ों कांवड़िए हरिद्वार में गंगाजल लेने आएंगे. हरिद्वार एक पवित्र तीर्थनगरी है. यहां मां गंगा सबका कल्याण करती है. इसलिए सभी कांवड़ियों से अपील है कि यहां की सुचिता और पवित्रता बनाएं रखें. सभी कांवड़िए तीर्थ पवित्रता को बनाए रखने के लिए व्रत करें.
इस बार का कांवड़ मेला व्यसन मुक्त हो, नियमों का पालन हो, सभी शिवभक्त कांवड़िए अनुशासित होते हैं. इसलिए आदर भाव के साथ हरिद्वार आएं. किसी भी प्रकार का ध्वनि प्रदूषण न करें। परम्परिक वाद्ययंत्रों के साथ भक्ति गीत गाएं.
निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी ने कहा कांवड़िए उस गंगाजल को लेने आते हैं. जिसे आज भी भगवान शिव ने अपनी जटाओं में समा रखा है, इसलिए सभी शिवभक्त तेज आवाज वाले डीजे न बजाएं. इससे आमजन को खतरा होता है. किसी प्रकार के धारदार हथियार और अस्त्र शस्त्र लेकर न चलें.
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी ने भी कांवड़ियों से अपील की है कि भारी भरकम कांवड़ न लेकर आएं. भारी और बड़े मटकों में जल न लेकर जाएं. इससे कांवड़ियों के कंधों और पीठ में पीड़ा होती है. कई बार यह घातक रोग में बदल जाते हैं. सभी कांवड़िए भगवान शंकर के गण हैं. उन्होंने सभी कांवड़ियों से श्रद्धापूर्वक हरिद्वार आने और शांतिपूर्ण तरीके से गंगाजल लेकर अपने गंतव्यों की ओर रवाना होने की अपील की है.