देहरादून ऋषिकेश को जाम से राहत दिलाने के लिए बनने जा रहा बाईपास अब हजारों पेड़ों के लिए खतरा बन गया है। परियोजना की जद में करीब 3,998 पेड़ आ रहे हैं, जिन पर कटने की तलवार लटक रही है। हालांकि, वन विभाग ने हरियाली बचाने के लिए कार्यदायी संस्था को पेड़ों की कटाई कम करने के निर्देश दिए हैं। चारधाम यात्रा और सामरिक लिहाज से बेहद अहम इस मार्ग पर बाईपास निर्माण जरूरी है, लेकिन सवाल यही है कि विकास की इस दौड़ में ऋषिकेश की हरियाली कितनी सुरक्षित रह पाएगी?
पेड़ों के प्रत्यारोपण के लिए 22 करोड़ रुपये का प्रावधान
परियोजना की जद में आने वाले पेड़ों को बचाने के लिए भी योजना बनाई गई है। चिह्नित पेड़ों में से 1,204 का प्रत्यारोपण किया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए 22 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। इससे पहले अगस्त में वन भूमि हस्तांतरण नोडल कार्यालय के अधिकारियों ने परियोजना स्थल का निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने प्रभावित होने वाले पेड़ों का दोबारा आकलन करने और वास्तविक जरूरत के आधार पर पेड़ों की कटाई की संख्या कम करने के निर्देश दिए थे।
वन विभाग ने जैव विविधता पार्क के शुरुआती हिस्से में करीब 250 मीटर लंबे भूमिगत मार्ग के डिजाइन में भी बदलाव करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य वन्यजीवों के आवागमन को आसान बनाने के साथ यातायात व्यवस्था को भी सुगम रखना है। साथ ही, निर्माण कार्य के दौरान कम से कम पेड़ प्रभावित हों, इसके लिए कार्यदायी संस्था भी योजना में बदलाव की कवायद कर रही है।वहीं, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए देहरादून और नरेंद्र नगर वन प्रभाग के लिए 22 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है।