एक बोर्डिंग स्कूल में पढ़ रहे छात्र के साथ को कुकर्म करने वाले स्कूल के कर्मचारी को दोषी ठहराते हुए न्यायालय प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश महेश चंद्र कौशिक की अदालत ने 7 साल कठोर कारावास और 15 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है. दोषी को साल 2023 में दो साल कारावास की सजा सुनाई थी. जिसके बाद उसने अपील की थी. साथ ही अभियोजन पक्ष ने दोषी की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की मांग की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया.
दिल्ली निवासी एक व्यक्ति ने 11 नवंबर 2011 को नगर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनका 13 वर्षीय बेटा देहरादून के एक बोर्डिंग स्कूल में सातवीं कक्षा में पढ़ता था. दीपावली के अवकाश में 15 अक्टूबर 2011 को वह अपने चाचा के साथ दिल्ली आया और 11 नवंबर 2011 को उसके चाचा ने उसे स्कूल छोड़ और दिल्ली वापस चले गए. उसके परिचित ने फोन पर सूचना दी कि बेटा स्कूल से भाग आया है और स्कूल के कर्मचारी ने उसके साथ कुकर्म किया है.
जब परिवार ने बेटे से पूछताछ की तो उसने बताया कि स्कूल कर्मचारी ने उसके साथ कुकर्म किया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी. इसके बाद इस मामले में नगर कोतवाली पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर 13 नवंबर 2011 को आरोपी को गिरफ्तार किया था. चार महीने जेल में रहने के बाद आरोपी मार्च 2012 में जमानत पर रिहा हो गया था. 11 साल तक कोर्ट में केस चलने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम उर्वशी रावत की अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 2 साल कठोर कर आवास और 10 हजार रुपए का जुर्माने की सजा सुनाई गई थी.
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अरविंद कपिल ने बताया है कि दोषी ने 25 सितंबर 2023 को अपील की जिसे अदालत में खारिज करते हुए सजा को बढ़ाकर 7 साल और जुर्माना 15 हजार करने का आदेश दिया. साथ ही जुर्माना ना अदा करने पर दोषी को 3 महीने का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना पड़ेगा.अदालत में दोषी को 29 जनवरी को उपस्थित होने का निर्देश दिया है.