उत्तराखंड में 19 अप्रैल से चारधाम यात्रा का श्रीगणेश हो जाएगा। यात्रा से पहले उत्तराखंड से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे देश में एक बहस छेड़ दी है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के गैर सनातन धर्म के लोगों पर बैन के बाद अब गंगोत्री मंदिर समिति ने हाल ही में एक फरमान जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि मंदिर में मां गंगा के दर्शन के लिए आने वाले यात्रियों को पंचगव्य का सेवन करना होगा।
उत्तराखंड के चार धामों में एक के बाद एक ऐसे फ़ैसले लिए जा रहे हैं, जिन्होंने हर किसी को पूरी तरह से हैरान कर दिया है। इस बार गंगोत्री मंदिर समिति ने हाल ही में एक ऐसा फरमान जारी किया है जो आस्था, विवाद और विज्ञान को एक साथ कटघरे में खड़ा करता है। मंदिर समिति की ओर से फैसला लिया गया है कि मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले गैर सनातन धर्म के लोगों को पंचगव्य पीना होगा।
बता दें पंचगव्य को गाय के गोबर, गंगाजल, घी, शहद और गोमूत्र को मिलाकर बनाया जाता है। मंदिर समिति का कहना है कि अगर कोई गैर सनातनी इस पंचगव्य का पान कर लेता है तो वो शुद्ध हो जाता है और सनातनी बन जाता है। जिसके बाद ही उसे गंगोत्री धाम में दर्शन करने की इजाज़त दी जाएगी।
मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने एक मीडिया चैनल को बताया कि यदि कोई मुस्लिम मंदिर आता है और ‘पंचगव्य’ ग्रहण करता है, तो वह ‘दर्शन’ (पूजा-अर्चना) कर सकता है, और इसके साथ ही उसकी ‘घर वापसी’ भी हो जाती है। दूसरे शब्दों में, हम उसे विधिवत रूप से सनातन धर्म में पुनः शामिल कर लेंगे। इसके अलावा, सनातन धर्म की परंपराओं के अनुसार उसका नाम भी बदल दिया जाएगा।
सचिव ने आगे बताया कि इसका पालन कराने के लिए 8 से 10 सदस्यों की एक समिति बनाई गई है। इस समिति में न केवल मंदिर के पुजारी शामिल होंगे, बल्कि कानूनी विशेषज्ञ, विशेष रूप से वकील भी शामिल होंगे। यह टीम यह सुनिश्चित करेगी कि यदि किसी गैर-सनातन व्यक्ति को प्रवेश से रोका जाता है या उसे पंचगव्य दिया जाता है, तो उस स्थिति में कोई कानूनी जटिलता या खामी न आए। गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव का कहना है कि वे किसी की भी धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं कर रहे हैं, बल्कि इसके विपरीत, वे अपने स्वयं के धर्म की पवित्रता की रक्षा कर रहे हैं।