उत्तराखंड में जंक फूड पर रोक की मांग, राज्य मानवाधिकार आयोग में जनहित याचिका दायर

उत्तराखंड राज्य में छोटे-छोटे बच्चों को नई-नई बीमारियां जैसे कैंसर, चक्कर आना ,हार्ट अटैक, मोटापा बढ़ना, छोटी उम्र में डायबिटीज का हो जाना ,हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लीवर और दांतों को बचपन में से ही खराब हो जाना और पाचन संबंधी समस्याएं और पोषण की कमी होने की बातों को देखते हुए हरिद्वार के अरुण भदोरिया एडवोकेट, कमल भदोरिया एडवोकेट, श्रीमती सुमेधा भदोरिया एडवोकेट पत्नी श्री अनिरुद्ध प्रताप सिंह, चेतन भदोरिया LLB अध्यनरत निवासी जगजीतपुर जिला हरिद्वार द्वारा अध्यक्ष, राज्य मानवाधिकार आयोग उत्तराखंड देहरादून में याचिका दायर कर प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य उत्तराखंड सरकार को पक्षकार बनाते हुए याचिका दाखिल की जिसमें उन्होंने बताया की हमारे देश हिंदुस्तान में फास्ट फूड सन 1990 के दशक के बाद आर्थिक उदारीकरण के साथ यह संस्कृति तेजी से बढ़ी तब कई अंतरराष्ट्रीय फास्ट फूड ब्रांड हमारे देश में आए और अधिकतर फास्ट फूड जैसे बर्गर ,पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज, हॉट डॉग और बड़े फास्ट फूड चैन मॉडल का विकास मुख्य रूप से अमेरिका से शुरू हुआ फिर पूरे दुनिया भर में फैला जबकि हमारे हिंदुस्तान देश में पहले से ही समोसा, कचोरी, पकोड़े , चाट ,वडा पाव, भेलपुरी जैसे जल्दी तैयार और तुरंत खाने वाले खाद्य पदार्थ मौजूद थे.

इन्हें भी व्यापक अर्थ में फास्ट फूड कहा जा सकता है लेकिन यह सभी फूड भारतीय पारंपरिक हिंदुस्तान आधुनिक पश्चिमी शैली की फास्ट फूड संस्कृति विदेश से आई जबकि हमारे देश हिंदुस्तान की अपने पारंपरिक खाद्य पदार्थ है इन विदेशि फास्ट फूड के द्वारा लगातार बच्चों के द्वारा अत्यधिक सेवन उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है और यह बच्चे और महिलाएं और नागरिकों के विकास पर गरिमा पूर्ण जीवन के अधिकार से जुड़ने का विषय बन जाता है बल्कि जन स्वास्थ्य और बाल संरक्षण का भी है इस पूर्ण तथ्यों को मानवधिकार आयोग के समक्ष प्रस्तुत करते हुए यह भी मांग की गई है इस विषय को जन स्वास्थ्य एवं मानवाधिकार के दृष्टिकोण से विचार के लिए स्वीकार कर साथ ही राज्य सरकार स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा संबंधित विभागों से इस विषय पर विस्तृत रूप से प्रतिवेदन तलब किया जाए और तत्काल प्रभाव से राज्य में विक्रय हो रही फास्ट फूड को रोके जाने हेतु एक SIT का गठन कर तत्काल प्रभाव से कार्यवाही सुनिश्चित कराई जाए, साथ बच्चों को लक्षित भ्रामक अथवा आक्रामक जंक फूड विज्ञापनों पर प्रभावी नियंत्रण हेतु उपयुक्त दिशा निर्देशों की अनुशंसा की जाए ,स्कूलों एवं शिक्षण संस्थानों के आसपास जंक फूड की बिक्री के प्रभावी नियमन हेतु राज्यों को आवश्यक कदम उठाने की अनुशंसा की जाए, खाद्य पदार्थों पर नमक चीनी एवं वसा की मात्रा स्पष्ट सरल एवं प्रमुख रूप से प्रदर्शित करने के उपाय को प्रोत्साहित किया जाए और संतुलित आहार पोषण एवं स्वस्थ जीवन शैली पर विद्यालयों में नियमित जन जागरूकता चलाने की अनुशंसा की जाए और इस विषय पर विशेष अध्ययन या विशेषज्ञ समिति गठित करने की अनुशंसा की जाए और यह विषय करोड़ बच्चों एवं नागरिकों के वर्तमान और भविष्य के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है इसलिए जनहित एवं मानवाधिकारों की सुरक्षा के उद्देश्य से विचार कर विपक्षी को आवश्यक कार्रवाई एवं अनुशंसाएं करने के लिए यह याचिका राज्य मानवाधिकार आयोग उत्तराखंड देहरादून में दायर की गई है फास्ट फूड से देखा जा रहा है की छोटे-छोटे बच्चों में कई बीमारियां पैदा हो रही है महिलाओं में कई बीमारियां पैदा हो रही है बच्चे छोटी-छोटी उम्र में ही मृत्यु के और अग्रसर हैं और राज्य मानवाधिकार आयोग इस संबंध में क्या दिशा निर्देश राज्य सरकार को करते हैं यह भविष्य ही बताएगा.

राज्य में फास्ट फूड की विक्रय पर तुरंत लगे रोक पर रिट दायर

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