हरिद्वार: करौली शंकर महादेव को ‘अपराधी बाबा’ लिखने पर कोर्ट पहुंचे अधिवक्ता, 175(3) BNSS के तहत मुकदमा दर्ज कराने की मांग

हरिद्वार के अधिवक्ता अरुण भदोरिया ने अपने पूज्य गुरुदेव श्री करौली शंकर महादेव के संबंध में एक पत्रकार एवं पोर्टल संचालक संजय कश्यप के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग को लेकर धारा 175(3) BNSS के तहत तृतीय अपर सिविल जज (जूनियर डिवीजन), हरिद्वार के न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। यह प्रार्थना पत्र उनके अधिवक्ता श्री कमल भदोरिया के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। मामले में न्यायाधीश श्री शमशाद अली ने थाना ज्वालापुर से इस संबंध में आख्या तलब की है कि मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया गया।

प्रार्थना पत्र में अरुण भदोरिया ने बताया कि श्री करौली शंकर महादेव एक धार्मिक संत, आध्यात्मिक गुरु एवं महामंडलेश्वर हैं और देश-विदेश में उनके बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं अनुयायी हैं। प्रार्थना पत्र के अनुसार, वर्ष 2026 में श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन द्वारा उन्हें महामंडलेश्वर पद से विभूषित किया गया है। अधिवक्ता का कहना है कि उनके गुरुदेव की सार्वजनिक पहचान और धार्मिक प्रतिष्ठा है, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों की धार्मिक आस्था उनसे जुड़ी हुई है।

प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि गोविंदपुरी निवासी संजय कश्यप ने अपने पोर्टल ‘भड़ास2मीडिया’ पर प्रकाशित एक समाचार की हेडलाइन में श्री करौली शंकर महादेव के लिए ‘अपराधी बाबा’ शब्द का इस्तेमाल किया। अरुण भदोरिया का आरोप है कि इस शब्द के इस्तेमाल से उनके गुरुदेव की धार्मिक एवं आध्यात्मिक पहचान को ठेस पहुंची तथा उनके सहित श्रद्धालुओं और अनुयायियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।

आवेदन में यह भी सवाल उठाया गया है कि समाचार प्रकाशित करने से पहले संबंधित न्यायालयों के रिकॉर्ड की जांच की गई थी या नहीं, संबंधित मामले में किसी वर्तमान दोषसिद्धि (conviction), FIR की स्थिति अथवा चार्जशीट की स्थिति की जानकारी ली गई थी या नहीं। प्रार्थी ने यह भी पूछा है कि ‘अपराधी’ शब्द के इस्तेमाल का कानूनी आधार और स्रोत क्या था।

अरुण भदोरिया ने आरोप लगाया है कि समाचार की हेडलाइन में ‘संत’, ‘महात्मा’, ‘धार्मिक गुरु’ या ‘महामंडलेश्वर’ जैसे शब्दों के स्थान पर जानबूझकर ‘अपराधी’ शब्द का इस्तेमाल किया गया, जिससे उनके गुरुदेव की धार्मिक एवं आध्यात्मिक पहचान को नुकसान पहुंचा और श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित हुई। उन्होंने इस पूरे मामले को सार्वजनिक इलेक्ट्रॉनिक प्रकाशन से जुड़ा मामला बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

प्रार्थना पत्र के अनुसार, इस संबंध में अरुण भदोरिया ने 15 सितंबर 2026 को कोतवाली ज्वालापुर में शिकायत दी थी। कार्रवाई नहीं होने पर 18 सितंबर 2026 को एसएसपी हरिद्वार को भी प्रार्थना पत्र दिया गया। वहां से भी कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने न्यायालय का रुख किया और धारा 175(3) BNSS के तहत मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग की। न्यायालय ने मामले में थाना ज्वालापुर से 26 सितंबर 2026 तक आख्या तलब की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *