देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में ब्रिटिश काल से मौजूद कई ऐतिहासिक इमारतें आज भी जर्जर स्थिति में हैं. जिसको देखते हुए जिला प्रशासन ने अब इनके संरक्षण एवं सुरक्षा के लिए बड़ी तैयारी शुरू कर दी है. देहरादून जिले में करीब 200 हेरिटेज साइटें चिन्हित की गई हैं.
देहरादून शहर में ब्रिटिश वास्तुकला की कई निशानियां आज भी मौजूद हैं. जिनमें अस्तली हॉल, एलआईसी बिल्डिंग, क्लॉक टावर, जामा मस्जिद, गुरु राम राय दरबार और सीएनआई बॉयज इंटर कॉलेज जैसे भवन शामिल हैं. समय के साथ रखरखाव की कमी और व्यावसायिक दबावों के चलते इनमें से कई इमारतें अब जर्जर हो चुकी हैं. शहर में करीब 200 से ज्यादा ऐतिहासिक स्थलों को प्रारंभिक सर्वे में चिन्हित किया गया है. इनमें कुछ भवन अभी भी कमर्शियल इस्तेमाल में हैं, लेकिन बिल्डिंग की स्थिति काफ़ी अधिक खराब हो चुकी है.
इसी साल, सितंबर महीने में चकराता रोड पर स्थित एलआईसी बिल्डिंग का एक हिस्सा अचानक गिर गया. जिससे एक कार और स्कूटी क्षतिग्रस्त हो गईं. ये वही बिल्डिंग है जिसे नगर निगम ने 2013 में ही गिरासू भवन घोषित कर दिया था, लेकिन मालिक- किरायेदार के बीच विवाद और मामला कोर्ट में होने के चलते इसे अभी गिराया नहीं जा सका. इसी के साथ नगर निगम की ओर से किए गए सर्वे में 21 अति-संवेदनशील और गिरासू भवनों को चिन्हित किया गया है. जिसमें से 8 भवनों में अभी भी निवास कर रह रहे हैं.
शहर के आढ़त बाजार, आराघर, पार्क रोड, खदरी मोहल्ला, दर्शनी गेट, मन्नूगंज, राजपुर रोड, कांवली रोड, कालागढ़ रोड, तिलक रोड, कैनाल रोड, निरंजनपुर वालिया कंपाउंड, मोती बाजार, गांधी रोड, रेस्टकैंप, सैय्यद मोहल्ला, घोसी गली, इंस्ट्रियल एरिया मोहब्बेवाला, वीरगीर वाली गली राजपुर, अंसारी रोड, पंडितवाड़ी, बल्लीवाला चौक, क्रॉस रोड फालतू रोड, धामावाला, ख़ुडबुडा, चुक्खूवाला, सोसाइटी एरिया भारुवाला ग्रांट, दिलाराम बाजार, इंद्रेशनगर कांवली रोड, पार्क रोड ओर झड़ा साहिब में गिरासू भवन हैं. नगर निगम की सूची में कई ऐसे गिरासू भवन भी हैं, जो खाली पड़े हैं.
देहरादून जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने पिछले महीने दून शहर में मौजूद जर्जर भवनों का सर्वे किए जाने को लेकर बैठक की थी. जिसमें ऐतिहासिक भवनों और स्थलों के संरक्षण पर चर्चा हुई थी. साथ ही हिस्टोरिक सिटी सीरीज- 2026 पहल के तहत एनजीओ और हेरिटेज संगठनों को शहर की विरासत का विस्तृत दस्तावेजीकरण करने का निर्देश दिए थे.
इसके साथ ही निर्णय लिया गया है कि अक्टूबर 2026 में एक विशेष कार्यशाला आयोजित की जाएगी. जिसमें विशेषज्ञों, नागरिकों और संगठनों से सुझाव लिए जाएंगे. महत्वपूर्ण हेरिटेज साइटों की पहचान कर शहर की टाउन प्लानिंग प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा. यही नहीं, डीएम ने जिला पर्यटन विकास अधिकारी को चिन्हित हेरिटेज साइटों के संरक्षण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का निर्देश दिये. जिन्हें बाद में राज्य सरकार के अनुमोदन के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा.