उत्तराखंड सरकार इन दिनों चारधाम के साथ-साथ हेमकुंड साहिब की यात्रा की तैयारियों में भी जुटी हुई है, लेकिन हेमकुंड साहिब में एक बाधा बार-बार खड़ी हो रही है, वो है गोविंदघाट में अलकनंदा नदी पर बना पुल. इस पुल की मदद से श्रद्धालु अलकनंदा नदी को पार कर हेमकुंड साहिब जाते है, लेकिन ये पुल अब दूसरी बार टूटा है. इससे पहले मार्च में भी ये पुल टूट गया था.
दरअसल, गोविंदघाट में अलकनंदा नदी पर बना पुल इससे पहले पांच मार्च को टूटा था. तब एक नेपाली मजदूर भी पुल की चपेट में आ गया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी. 25 मई से हेमकुंड साहिब की यात्रा शुरू होने वाली है. इसीलिए सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया और जल्द से जल्द से पुल बनाने का निर्णय लिया गया.
चमोली जिला प्रशासन ने भी तत्काल पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) और अन्य एजेंसियों को नए पुल के निर्माण का जिम्मा सौंपा था. पुल का निर्माण कार्य चल ही रहा था कि बुधवार 9 अप्रैल को आए तेज आंधी तूफान से पुल का आधा हिस्सा नदी की तरफ झुका गया. ऐसे में एक बार फिर इस पुल ने प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी है.
बता दें कि गोविंदघाट में अलकनंदा नदी पर बने 75 मीटर लंबे बेली ब्रिज को पार कर ही श्रद्धालु हेमकुंड साहिब, लोकपाल लक्ष्मण मंदिर और फूलों की घाटी जाते हैं. हालांकि लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता नवीन ध्यानी इसे तकनीकी गड़बड़ी या ओवर हैंग फॉल्ट मान रहे है.
अधिशासी अभियंता ध्यानी की माने तो इस मामले को गंभीरता से लिया गया है और पूरे इस मामले की रिपोर्ट बनाकर शासन को भी भेजी गई है. बता दें कि 25 मई के दिन हेमकुंड साहिब के कपाट खोले जाएंगे, लेकिन हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा कमेटी के सदस्य उससे पहले धाम पहुंचकर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करते है. ऐसे में सवाल यहीं खड़ा हो रहा है कि 25 मई से पहले यदि पुल सही नहीं होता है तो श्रद्धालु हेमकुंड साहिब कैसे जाएंगे?