देहरादून में नारियल पानी बेचने वालों पर रहेगी पैनी नजर, जानें इसके शेल से कैसे है डेंगू का खतरा

देहरादून में बारिश के बाद डेंगू के मरीजों में इजाफा हो सकता है. राजधानी देहरादून में अप्रैल के बाद से लेकर अभी तक 45 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है. इनमें से 26 डेंगू के मरीज देहरादून के हैं, जबकि 19 रोगी अन्य जिलों व राज्यों के हैं. मंगलवार तक 11 डेंगू मरीजों का इलाज देहरादून के अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा था.

देहरादून के डेंगू नियंत्रण नोडल अधिकारी डॉक्टर सीएस रावत ने बताया कि शहर कि सभी पैथोलॉजी लैबों को डेंगू जांच को लेकर आवश्यक निर्देश भी दिए गए हैं. जांच के निर्धारित शुल्क तय किए गए हैं. उन्होंने बताया कि बीते साल डेंगू की जांच के लिए जो रेट स्वास्थ्य विभाग की ओर से तय किए गए थे, वही शुल्क इस बार भी पैथोलॉजी लेबों के लिए निर्धारित किये गए हैं.

इसके अलावा प्राइवेट लैब संचालकों को काउंटर के पास रेट लिस्ट चस्पा करने को भी कहा गया है, ताकि डेंगू के संदिग्ध रोगियों से अधिक शुल्क वसूला ना जा सके. उन्होंने बताया कि आने वाले समय में डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ सकती है, जिसको देखते हुए सभी अस्पतालों को दस प्रतिशत बेड रिजर्व रखने को कहा गया है.

इस बार स्वास्थ्य विभाग डेंगू की रोकथाम को लेकर नारियल पानी बेचने वालों पर भी पैनी निगाह रखेगा. अक्सर गर्मियों के मौसम में सबसे ज्यादा बिकने वाला नारियल पानी पीने के बाद उसके शेल को इधर-उधर फेंक दिया जाता है. नारियल पानी भले ही लोगों के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना जाता है, लेकिन नारियल पानी पीने के बाद इसका खाली खोल फेंक दिया जाता है, जिसके अंदर डेंगू का लार्वा पनपने के सबसे ज्यादा चांस होते हैं.

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