राज्य कर्मचारियों की सैलरी में देरी पर मानवाधिकार आयोग में याचिका, ब्याज कर्मचारियों को देने की मांग

राज्य कर्मचारियों को प्रतिमाह जो उनके खाते में सैलरी मिल रही है जिससे भ्रष्टाचार पर भी पूर्ण विराम लगा है लेकिन राज्य कर्मचारियों की खाते में सैलरी जो आती है वर्तमान में कंप्यूटर और डिजिटल का जमाना होने के बावजूद यह सैलरी चार-पांच दिन की देरी से प्रतिमाह खाते में आती है उस अवधि का जो ब्याज होता है वह ब्याज बैंक के पास जाता है ,इन सब तथ्यों को देखते हुए हरिद्वार के अरुण भदोरिया एडवोकेट ,कमल भदौरिया एडवोकेट, श्रीमती सुमेधा भदोरिया एडवोकेट पत्नी श्री अनिरुद्ध प्रताप, चेतन भदोरिया LLB अध्यनरत ,आयुष जायसवाल LLB अध्यनरत, शाहनवाज मलिक LLB अध्यनरत ने एक याचिका इस संबंध में मानव के अधिकारों का उल्लंघन मानते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग उत्तराखंड देहरादून में इस संबंध में दायर की है और मांग की है कि राज्य के कर्मचारियों के अधिकारों का उल्लंघन बैंक द्वारा किया जा रहा है’

क्योंकि प्रत्येक राज्य के कर्मचारियों के बैंक खाते में दाखिल होने वाली सैलरी से संबंधित मिलने वाला ब्याज चार-पांच दिन की देरी का अवधि का राज्य कर्मचारियों को ही ब्याज दिया जाए, साथ ही जब से भी डिजिटल और कंप्यूटर की प्रक्रिया शुरू हुई है तब से लेकर वर्तमान तक प्रत्येक राज्य कर्मी को ट्रेजरी द्वारा बैंक में और बैंक द्वारा राज्य कर्मी के खाते में दाखिल का देरी से सैलरी में चार-पांच दिन वाला ब्याज लगातार का दिलवाया जाए ,इसके अलावा अन्य अनुतोष जो राज्य मानवाधिकार आयोग उचित समझे उसे भी दीलवाने की मांग की गई है। ट्रेजरी जो प्रत्येक जनपद में है उनके द्वारा राज्य के कर्मचारियों को सैलरी प्रतिमाह दी जाती है और बैंक के द्वारा राज्य के कर्मचारियों को चार-पांच दिन के बाद उनके खाते में दाखिल की जाती है इस दौरान चार-पांच दिन का होने वाला ब्याज बैंक कर्मियों द्वारा अपने पास रख लिया जाता है जबकि इस पैसे के हकदार राज्य के कर्मचारी है इन सब बातों को देखते हुए हरिद्वार के भदोरिया एडवोकेट एसोसिएट ने राज्य मानवाधिकार आयोग उत्तराखंड में याचिका दायर की है जिससे राज्य के कर्मचारियों को काफी राहत मिलेगी

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