हिंदुस्तान में प्रत्येक राज्य में ग्राम पंचायत के चुनाव के पश्चात यदि किसी गांव के प्रधान की मृत्यु किसी कारणवश हो जाती है तो राज्य सरकार दोबारा चुनाव की प्रक्रिया करती है जिससे आम लोगों से लिया गया टैक्स के रूप में और इनकम टैक्स के रूप में ली गई धनराशि के जरिए दोबारा चुनाव ग्राम प्रधान का कराया जाता है उससे धनराशि का दुरुपयोग होता है ,इस संबंध में हरिद्वार के अरुण भदोरिया एडवोकेट,कमल भदोरिया एडवोकेट, सुमेधा भदोरिया एडवोकेट पत्नी श्री अनिरुद्ध प्रताप सिंह, चेतन भदोरिया LLB अध्यनरत शाहनवाज मलिक LLB अध्यनरत ने इस संबंध में राज्य मानवाधिकार आयोग उत्तराखंड देहरादून में एक याचिका दायर करते हुए जानकारी दी है कि ग्राम पंचायत जो कि एक लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की मूल इकाई है और संविधान के भाग 9 में पंचायत को संवैधानिक दर्जा दिया गया है संविधान का अनुच्छेद 243 बी ग्राम पंचायत की स्थापना करना तथा अनुच्छेद 243 सी उनकी संरचना से संबंधित है और संविधान के अनुच्छेद 243 ई के अनुसार प्रत्येक पंचायत का कार्यकाल प्रथम अधिवेशन की तारीख से 5 वर्ष का होता है और फिर इसी दौरान यदि किसी ग्राम प्रधान की मृत्यु होती है तो ग्राम प्रधान का पद रिक्त हो जाता है और उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम की धारा 16 में ऐसे आकस्मिक रीती को भरने की व्यवस्था की गई है इस धारा में मृत्यु हो जाने पर, हटाए जाने पर, त्यागपत्र देने से जो रिक्ति होती है.

उसके शेष कार्यकाल को भरने की व्यवस्था होती है, यदि शेष अवधि 6 महीने से कम है तो रिक्ति न भरने का प्रावधान है और ऐसे उपचुनाव में निर्वाचन अधिसूचना निर्वाचन अधिकारी एवं कर्मचारी, सुरक्षा व्यवस्था, मत पत्र एवं मतदान केंद्र निर्वाचन सामग्री, स्टेशनरी ,परिवहन, प्रशिक्षण, मतगणना तथा अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सार्वजनिक धन भी खर्च होता है और वह राज्य के सार्वजनिक कोस पर पड़ता है राज्य सार्वजनिक कोश जो कि राज्य वासियों से प्राप्त राजस्व एवं करो से संचालित होता है और इन उपचुनाव के लिए सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उनके नियमित प्रशासनिक कार्यों से हटकर निर्वाचन कार्य में लगाया जाता है जिससे विकास कार्य ,राजस्व कार्य, पंचायत संबंधित कार्य तथा अन्य जन सेवाओं पर प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है फिर जिस जगह चुनाव होगा मतदान केंद्र, सरकारी प्राथमिक पाठशाला, उच्च प्राथमिक विद्यालय में होता है और बच्चों की जो नियमित पढ़ाई में भी व्यवधान आता है और इस संबंध में भदोरिया एसोसिएट के द्वारा माननीय राज्य मानवाधिकार आयोग उत्तराखंड देहरादून में याचिका दायर कर दी है और उसमें मांग की है
1……. ग्राम पंचायत के निर्वाचित उप प्रधान को शेष कार्यकाल के लिए प्रधान का कार्यभार प्रदान करने की कानूनी व्यवस्था बनाई जाए,
2….. ग्राम पंचायत के निर्वाचित सदस्यों में से ही प्रधान का चुनाव कराने की व्यवस्था हो
3…… उपचुनाव न करने की सीमा का पुनर्विचार किया जाए
4….. राज्य मानवाधिकार आयोग राज्य सरकार एवं राज्य निर्वाचन आयोग से ग्राम प्रधान की मृत्यु से उत्पन्न रिक्ति पर उपचुनाव कराने पर राज्य के सार्वजनिक कोस से कितना खर्च होता है इसकी रिपोर्ट मंगाई जाए
5…….. साथ में ही उपचुनाव में लगाए गए अधिकारियों की संख्या तथा सरकारी विद्यालयों में मतदान केंद्र में उपयोग किए जाने के कारण हुए शैक्षणिक व्यवधान का विवरण की बाबत भी रिपोर्ट मंगाई जाए
6……. साथ ही निर्वाचित सदस्यों में से ही किसी व्यक्ति को लोकतांत्रिक एवं वैधानिक प्रयोग क्रिया के द्वारा शेष कार्यकाल के लिए प्रधान बनाने की व्यवस्था कराई जाए
7…… चुनाव के लिए सरकारी स्कूलों का उपयोग में होने वाले प्रावधान को रोकने के लिए राज्य सरकार को निर्देश दिए जाएं
8……. राज्य निर्वाचन आयोग से यह भी रिपोर्ट मंगाई जाए की ग्राम प्रधान के प्रत्येक आकस्मिक चुनाव पर अनुमानित एवं वास्तविक खर्च कितना हुआ तथा उसमें स्टेशनरी, परिवहन ,कार्मिक, सुरक्षा ,मतदान केंद्र एवं अन्य मदों में कितना खर्च हुआ।
इस संबंध में राज्य मानवाधिकार आयोग द्वारा यदि इस संबंध में राज्य सरकार को उपरोक्त निर्देश पर कार्रवाई की जाती है तो आम जनता का पैसा की बचत होगी जो राज्य के विकास में लगाया जा सकेगा