राजधानी देहरादून के नगर निगम क्षेत्र में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को अब ट्रेड लाइसेंस के लिए अधिक शुल्क देना होगा. 1998 में देहरादून नगर निगम बनने के बाद से इन 27 सालों के भीतर ट्रेड लाइसेंस संबंधित नियमों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है. जिसके चलते न सिर्फ ट्रेड लाइसेंस शुल्क काफी कम है बल्कि तमाम व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी ट्रेड लाइसेंस के दायरे से बाहर हैं. जिसको देखते हुए देहरादून नगर निगम उपविधि (bye-laws) को लागू करने संबंधित प्राथमिक नोटिफिकेशन जारी दी है. इस उपविधि में न सिर्फ छूटे हुए व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को शामिल किया गया है बल्कि ट्रेड लाइसेंस की दरों में भी संशोधन किया गया है.
नगर निगम की ओर से तैयार किए गए उपविधि में प्रस्तावित ट्रेड लाइसेंस के शुल्क से संबंधित सुझाव भी मांगे गए हैं. ऐसे में देहरादून नगर निगम क्षेत्र में व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालक 31 मई तक अपने सुझाव दे सकते हैं. ऐसे में सभी स्टेकहोल्डर की ओर से दी गई आपत्तियां और सुझाव के आधार पर उपविधि में प्रस्तावित ट्रेड लाइसेंस शुल्क में संशोधन करते हुए फाइनल नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा. लिहाजा फाइनल नोटिफिकेशन जारी होने के बाद देहरादून नगर निगम क्षेत्र में संचालित सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नए नियम के तहत ही ट्रेड लाइसेंस शुक्ल का भुगतान करना होगा.
नगर निगम की ओर से उपविधि का प्राथमिक नोटिफिकेशन जारी होने के बाद व्यापारी वर्ग काफी नाराज और कंफ्यूज दिखाई दे रहे हैं. दून व्यापार संघ के सदस्य मनु कोचर ने कहा देहरादून के लगभग सभी होटल संचालक वित्तीय वर्ष 2025-26 के ट्रेड लाइसेंस संबंधित भुगतान कर चुके हैं. उन्हें लाइसेंस भी मिल चुका है, लेकिन अब नगर निगम किन वजहों से नया लाइसेंस देना चाह रहा है ये उन्हें समझ नहीं आ रहा है. मनु ने बताया होटल व्यवसाय संचालित करने के लिए 9 तरह के लाइसेंस लेने होते हैं, जो अलग-अलग संस्थाओं से लिए गए हैं. ऐसे में नगर निगम के अनुसार इस नए लाइसेंस को लेने से उनके सभी पुराने लाइसेंस निरस्त हो जाएंगे. जिसके चलते सवाल यही उठ रहे हैं कि नगर निगम बाकी लाइसेंस को कैसे बाईपास करेगा